Indian Economy in Hindi – सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थवयवस्था – एक नजर

Indian Economy के लक्षण & विषेशताएं एक नजर 2017-18

Indian Economy In Hindi

भारतीय अर्थवयवस्था आज के समय की सबसे उभरती हुई अर्थवयवस्था है जो पूरी विश्व में अपना नाम कर रही है आज हमारे देश की Economy विश्व के कई देशों को पीछे छोड़ रही है कुछ देशों को तो पीछे भी छोड़ दिया है भारत की इकॉनमी सबसे तेजी से बढ़ती हुई इकॉनमी मानी जा रही है। यहाँ पर हर सेक्टर में बहुत तेजी से विकास हो रहा है। जब से नरेंद्र मोदी जी प्रधान मंत्री बने है तब से भारत की इकॉनमी में काफी कुछ अच्छा हो रहा है देश आज विश्व में जाना जा रहा है लोग भारत में अपना बिज़नेस लगाने के लिए उत्साहित है। भारत पिछले कुछ सालों में बहुत तरक्की किया है हमारे देश में बहुत सारे काम पिछले कुछ सालों में नए हुए है जिससे हमारी अर्थव्यवस्था कुछ अच्छी हुई है। आशा की जा रही है की आने वाले कुछ ही सालों में भारत विश्व के जाने माने देशों की अर्थवयवस्था के कतार में होगा। इतना कुछ होने के बाद भी हमारी इकॉनमी की मूल विषेशताएं इस प्रकार है।

भारतीय अर्थब्यवथा की मूल विषेशताएं एक नजर

निम्न प्रति ब्यक्ति आय.
भारत का ब्यवसायिक ढांचा, प्राथमिक उत्पादनशील है।
जनसंख्या का लगातार बढ़ता दबाव।
भारत में ब्याप्त बेरोजगारी की समस्या।
पूजी का अभाव।
परिसम्पतियों का दोषपूर्ण वितरण।
निम्न तकनिकी।
निम्न जीवन स्तर।
घटिया किस्म की मानव पूजी
जनांकिया लक्षण एक अल्पविकसित देश के है।
निर्बल आर्थिक संगठन।
उपभोग की समाजार्थिक सूचक भारत में अल्पविकसित अर्थबवस्था के लक्षण मात्र है।

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भारत में प्रति ब्यक्ति आय का स्तर बहुत ही नीचा है, विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट 2014 में भारत में प्रति ब्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 1497.5 डॉलर बताया था। लेकिन आज हमारी पोजीशन अच्छी हुई है।
भारत में क्रय सकती समता कम है।
भारत में प्रति ब्यक्ति भूमि बहुत कम है।
भारत का कुल श्रम शक्ति का लगभग 54% भाग कृषि भूमि में लगा है तथा देश की 65 से 70 प्रतिसत आबादी कृषि से आजीविका प्राप्त करती है।
भारत में जनसंख्या बहुत ज्यादा है इसलिए यह भी एक कारण हो सकता है।
अभी भारत की इकॉनमी का संतुलित विकास नहीं हुआ है।
भारत में अभी भी गावों व शहरों में करोड़ों ब्यक्ति निर्धनता की रेखा से नीचे जीवन यापन करते है।
रंगराजन समिति की रिपोर्ट (2011-12) के अनुसार आज भी भारत देश की 29.5% जनसंख्या निर्धनता के नीचे जीवन यापन कर रही है।

Indian Economy

राष्ट्रीय आय कम होने तथा इसका एक भाग उपभोग ब्यय हो जाने से बचत कम हो पाती है।
आधारभूत उद्योगों के पिछड़ेपन के कारण इकॉनमी पृष्ठ्भूमि में तीब्र विकास के लिए आवश्यक पृष्ठभूमि तैयार नहीं हो पाती है। देश के ऐसे कई जगह है जहां प्रचुर मात्रा में खनिज प्रदार्थ उपलब्ध है, किन्तु यातायात के साधनों के अभाव के कारण इन एरिया में उद्योगों की स्थापना नहीं हो पा रही है। भारत के परम्परावादी समाज में अनेक सामाजिक प्रथाएं, कुरीतियां तथा अंधविस्वाश बुरी तरह से ब्याप्त है, जिसका अर्थवयवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। हमारे देश में बाल विवाह , मृतक भोज, विवाह पर दावतें तथा आभूषण निर्माण जैसे अनुत्पाद कार्यों के लिए कर्ज लेकर भी जरुरत से ज्यादा खर्च कर दिया जाता है इस सब कारण भी एक विसेसता में आता है।
इंडस्ट्रियल सेक्टर में अभी तीब्र बृद्धि आयी है।
आधारभूत और पूजी उद्योगों का विकास हुआ है भारत में लोहा एवं इस्पात, भारी इंजीनियरिंग, रसायन, उर्बरक, बिजली के भारी उपकरण, पेट्रोलियम, रेल आदि के सेक्टर में तेजी से अच्छी प्रगति हुई है।
अवस्थापन के सेक्टर में भी बहुत तेजी देखने को मिली है तथा जीवन की क्वालिटी में भी काफी तेजी से सुधर हुए है।
प्राथमिक बस्तुओं के स्थान पर निर्मित बस्तुओं का निर्यात में बृद्धि हुई है।

भारतीय इकॉनमी के आर्थिक विकास की निम्न अवस्थाएं इस प्रकार है।

परम्परागत समाज
स्फुर्ति के पूर्व की दशा
स्फुर्ति की दशा
परिपक्ता की ओर
अत्यधिक उपभोग की अवस्था

निम्न आय वर्ग वाले देश – जहां के लोगों की आय सबसे निम्न है।

बांग्लादेश
वर्मा
अफगानिस्तान
भारत
श्री लंका
चीन
पकिस्तान
तन्जानिया
कीनिया और सूडान आदि (World Development Report (2006)) के अनुसार

कुछ महत्वपूर्ण Points

विकसित देशों की तुलना में भारत की प्रतिब्यक्ति आय बहुत कम है। आज के समय में कुछ सुधार हुए है।
विकसित देशों की तुलना में अल्प विकसित देशों में कृषि में अधिक लोग कार्यरत है यह भी के एक फैक्टर होता है।
विश्व बैंक 2008 की रिपोर्ट के अनुसार 2006 में जहाँ स्विट्ज़रलैंड की प्रति ब्यकित आय 57,230 Dollar USA 44870 Dollar ,Japan 34810 डॉलर रही, वहीँ इंडिया की प्रति ब्यकित आय 820 Dollar ही रही।

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